Monday, April 4, 2022

बूचा में हुआ क्या था?


युद्ध में दो या तीन सप्ताह बाद ही रूसी सेना ने अपना मूमेंटम यानी गति खो दी. बूका की सड़कों पर ये साफ़ नज़र आता है.


रूस के एयरबॉर्न फ़ोर्स के एलीट ट्रूप बख्तरबंद वाहनों में शहर तक आए थे. ये वाहन इतने हल्के थे कि इन्हें विमान के ज़रिए एक जगह दूसरी जगह ले जाया जा सता था. ये एलीट फोर्स के लोग बूचा से कुछ मील दूर होस्टोमेल हवाई अड्डे पर उतर कर यहां तक आए थे. इस हवाई अड्डे को रूसी अर्धसैनिकों ने अपने कब्ज़े में ले लिया था.

मलबे में तब्दील शहर

यहां सड़के संकरी और सीधी है, घात लगाने या छिप कर हमला करने के लिए एकदम आदर्श मानी जाती हैं. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यूक्रेन ने तुर्की से खरीदे गए बायरख़्तर अटैक ड्रोन से रूस के काफ़िले पर हमला किया. आस-पास के इलाकों में रहने वाले अन्य लोगों ने कहा कि यहां यूक्रेनी सेना के साथ-साथ रक्षा वॉलेंटियर भी मौजूद थे.


हालाँकि यूक्रेन इस काफ़िले को रोक सका, रूस के मुख्य वाहनों को नष्ट कर दिया गया लेकिन ये मलबे को हाथ तक नहीं लगाया गया है.


अभी भी 30 मिमी तोप के गोले घास पर पड़े हुए हैं, कई और भी गोलों के ख़तरनाक टुकड़े सड़कों पर पड़े हुए हैं.


स्थानीय लोगों का कहना है कि कई रूस के युवा सैनिक भाग खड़े हुए तो कुछ पकड़े जाने पर अपनी जान की भीख मांगने लगे.


70 वर्षीय एक शख़्स खुद को अंकल हैरिशा बताता है. वह कहता है, '' "मुझे उनके लिए दुख हो रहा था. वे 18 से 20 साल के लड़के थे उनके आगे उनका पूरा जीवन पड़ा हुआ था."


ऐसा लगता है कि बूचा से बाहर निकलते रूसी सैनिकों में कोई दया नहीं थी. कम से कम 20 मृत रूसी सैनिक सड़कों पर पड़े हुए थे जब रूसी सेना ने बूचा का इलाका खाली किया. इनके हाथ पीछे की ओर बंधे हुए थे.


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